पशु विकृति: 50 साल पुराना वो UFO रहस्य जिसे कोई सुलझा नहीं पाया
गाय मरी मिली, अंग कटे, न खून, न पैरों के निशान। 50 साल तक किसानों ने UFO और एलियन को दोषी ठहराया। FBI जाँच में असल में क्या निकला?
भोर के समय एक किसान खेत में निकलता है और देखता है — उसकी एक गाय खुले मैदान में मरी पड़ी है। पर कुछ ठीक नहीं लग रहा। एक आँख गायब है। जीभ गायब है। खाल के कुछ हिस्से ऐसे दिख रहे हैं जैसे किसी ने काटा हो — साफ-सुथरी रेखाएँ, मानो किसी ऑपरेशन के चाकू ने काम किया हो। ज़मीन पर एक बूँद खून नहीं। घसीटने के निशान नहीं। भेड़िये या सियार के पैरों के निशान नहीं। कुछ भी इस जानवर तक चलकर नहीं आया, और कुछ भी यहाँ से चलकर नहीं गया।
और लाश खाने वाले जानवर? वे इसे छूते तक नहीं।
पचास साल से भी ज़्यादा समय से, अमेरिका के पश्चिमी इलाकों में ऐसे ही दृश्य बार-बार सामने आते रहे हैं। और लोगों ने हर चीज़ को दोषी ठहराया — सरकार के गुप्त प्रयोगों से लेकर शैतानी पंथों तक, और अँधेरे में बिना आवाज़ उड़ते एलियन यानों तक। तो आख़िर इन जानवरों को मार कौन रहा है? चलिए देखते हैं कि हम असल में क्या जानते हैं।

दर्ज किए गए तथ्य
शुरुआत एक घोड़े से हुई। सितंबर 1967 में, कोलोराडो के अलामोसा के पास, एक तीन साल का घोड़ा मरा हुआ मिला — उसका सिर और गर्दन की खाल छिली हुई थी, हड्डियाँ तक नंगी। कटाई इतनी सटीक लग रही थी, मौके पर खून नहीं था, और हवा में एक अजीब-सी दवा जैसी गंध फैली थी। प्रेस ने घोड़े का नाम गलत छाप दिया और उसे "स्निपी" कह दिया — और यही नाम हमेशा के लिए चिपक गया (विकिपीडिया: "स्निपी" की विकृति)। यह बिल्कुल पहला मामला था जब अख़बारों ने यह विचार उछाला कि कहीं इसमें UFO और एलियन तो शामिल नहीं (विकिपीडिया)।
फिर यह फैलता चला गया। दिसंबर 1973 तक, कैनसस की पुलिस ने सात काउंटियों में करीब 40 विकृतियाँ दर्ज कर ली थीं (HISTORY)। और फिर यह सिलसिला फट पड़ा। अप्रैल से अक्टूबर 1975 के बीच, अकेले कोलोराडो में करीब 200 पशु विकृति के मामले दर्ज हुए — इतने ज़्यादा कि कोलोराडो एसोसिएटेड प्रेस ने इसे उस साल राज्य की नंबर एक ख़बर चुना (HISTORY)।
सभी रिपोर्टों में एक जैसी रोंगटे खड़े कर देने वाली बातें थीं। मुलायम अंग गायब — आँखें, जीभ, कान, थन, जननांग। ऐसी कटाई जिसके बारे में किसान कसम खाते थे कि यह सर्जरी जैसी सटीक है। ऐसी लाशें जो खून से पूरी तरह खाली लगती थीं। और कभी-कभी, लोग मौके के पास बिना निशान वाले हेलीकॉप्टर और अजीब रोशनियाँ देखने की बात करते थे (HISTORY)।
मामला इतना बड़ा हो गया कि सरकार को बीच में आना पड़ा। कोलोराडो के सीनेटर फ्लॉयड के. हास्केल ने अपने राज्य के करीब 130 मामलों की ओर इशारा करते हुए FBI से मदद माँगी (HISTORY)। FBI की अपनी फाइलें — जो अब सार्वजनिक हैं — दिखाती हैं कि वह इसे स्थानीय एजेंसियों के हाथों में ही छोड़ने के पक्ष में झुकी, क्योंकि किसी अंतर-राज्यीय अपराध का कोई साफ़ सबूत नहीं था जो ब्यूरो को इसमें दख़ल देने का अधिकार देता (FBI रिकॉर्ड्स: द वॉल्ट — पशु विकृति)।
तो 1979 में पैसा मेज़ पर रखा गया। अमेरिकी न्याय विभाग ने न्यू मैक्सिको के ज़िला अटॉर्नी के दफ़्तर को $44,170 का अनुदान दिया, और सेवानिवृत्त FBI एजेंट केनेथ रॉमेल ने "ऑपरेशन एनिमल म्यूटिलेशन" नाम की एक पूरी जाँच चलाई (विकिपीडिया: पशु विकृति)। 1980 में छपी उनकी अंतिम रिपोर्ट 297 पन्नों की थी। एक के बाद एक मामले को जाँचने के बाद, रॉमेल इस नतीजे पर पहुँचे कि ये मौतें मुख्य रूप से प्राकृतिक शिकारियों और लाश खाने वाले जानवरों की वजह से हुईं — हालाँकि उन्होंने माना कि मुट्ठी भर मामलों में कुछ अजीब बातें थीं जिन्हें वे पूरी तरह समझा नहीं पाए (विकिपीडिया: पशु विकृति)।

असली अनसुलझा सवाल
अब ईमानदारी की बात। ज़्यादातर पशु विकृति के मामलों का जवाब बड़ा सीधा-सादा है। पर "ज़्यादातर" का मतलब "सभी" नहीं होता।
कुछ मामले ऐसी बातों के साथ आते हैं जिन्हें आज तक कोई साफ़-साफ़ नहीं समझा पाया। मार्च 1978 का एक मामला लीजिए, जो न्यू मैक्सिको के डल्से के पास हुआ और जिसे राज्य पुलिस अधिकारी गेब वाल्डेज़ ने दर्ज किया। मरे हुए जानवर पर हुए लैब परीक्षणों में कथित तौर पर सामने आया कि उसके लिवर में तांबा बिल्कुल शून्य था, और जस्ता, पोटैशियम और फॉस्फोरस सामान्य से चार गुना ज़्यादा — ऐसे नतीजे जिनके बारे में जाँच करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा कि वे इनका कोई हिसाब नहीं लगा पाए (विकिपीडिया: पशु विकृति)। वाल्डेज़ ने रॉमेल के सुलझे-सुलझाए नतीजे पर भी सवाल उठाया, यह कहते हुए कि जाँच में असल में ताज़ा जानवरों को नज़दीक से देखने से बचा गया (विकिपीडिया: गेब वाल्डेज़)।
तो असली सवाल यह नहीं है कि "क्या एलियन गायों की फसल काट रहे हैं।" यह उससे कहीं छोटा और कहीं ज़्यादा दिलचस्प है: आख़िर मुट्ठी भर मामले उस आम जवाब को क्यों नकार देते हैं जो बाकी सब पर फिट बैठ जाता है? ग़लत नमूने लेना? लापरवाह लैब काम? बस इत्तेफ़ाक? या सचमुच कुछ अजीब? यह हिस्सा आज भी अनसुलझा है।

सिद्धांत और व्याख्याएँ
अब यहाँ हम सारी व्याख्याओं को छाँटते हैं — और साफ़ बताते हैं कि कौन-सी सिर्फ़ अटकल है।
लाश खाने वाले जानवर और सड़न (सबसे मज़बूत व्याख्या)। यही वो जवाब है जिसके पीछे असली सबूत हैं। जब कोई जानवर मरता है, तो लाश खाने वाले सबसे पहले मुलायम और आसान हिस्सों पर टूट पड़ते हैं — आँखें, जीभ, होंठ, जननांग, शरीर के खुले हिस्से। बाकी काम मक्खियाँ और कीड़े पूरा कर देते हैं। बस इतना ही "गायब अंगों" के ज़्यादातर रहस्य को समझा देता है (HISTORY)। और वो "खून न होने" वाली बात? मौत के बाद दिल रुक जाता है और खून गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर के सबसे निचले हिस्से में जमा हो जाता है — इस प्रक्रिया को लिवर मोर्टिस कहते हैं — इसलिए लाश के ऊपर वाले हिस्से खाली दिखते हैं (HISTORY)। और वो "सर्जरी जैसी कटाई"? जैसे-जैसे लाश में गैस भरकर फूलती है, तनी हुई और सूखती हुई खाल साफ़ सीधी रेखाओं में फट जाती है — जो बिल्कुल इंसान की बनाई हुई लगती है।
यह सिर्फ़ काग़ज़ पर लिखा कोई सिद्धांत नहीं है। 1979 के एक प्रयोग में, अर्कांसस के वॉशिंगटन काउंटी शेरिफ़ के दफ़्तर ने एक मरी हुई गाय को खेत में रखा और बस उसे देखते रहे। करीब 48 घंटे बाद, फूलने की वजह से खाल में ऑपरेशन जैसी दरारें बन गईं जो लोगों की बताई "सर्जरी जैसी" कटाई से बिल्कुल मेल खाती थीं, और मक्खियों और कीड़ों ने मुलायम अंगों को ठीक वैसा ही नुकसान पहुँचाया (HISTORY)। उसी दौरान, अर्कांसस यूनिवर्सिटी की मानवविज्ञानी नैन्सी ओवेन ने राज्य के मामलों का अध्ययन किया और उसी नतीजे पर पहुँचीं: यह सब लाश खाने वाले जानवरों से मेल खाता है (एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ अर्कांसस)।
पंथ और इंसानी शरारतें (अटकल, कभी साबित नहीं हुई)। 1970 के दशक में बहुत लोग डरते थे कि गुप्त पंथ अनुष्ठानों के लिए पशुओं को मार रहे हैं। डोनाल्ड फ्लिकिंगर नाम के एक ATF एजेंट ने 1975 में संभावित पंथ संबंधों की जाँच की — और बिना किसी संगठित गिरोह को साबित किए केस बंद कर दिया (विकिपीडिया: पशु विकृति)। इसे असाबित ही मानिए।
सरकार के गुप्त प्रयोग (अटकल, असाबित)। बिना निशान वाले हेलीकॉप्टरों की रिपोर्टों ने इस सिद्धांत को हवा दी कि सरकार चुपके से पशुओं में रेडिएशन या बीमारी की जाँच कर रही है। इसका कोई दर्ज सबूत नहीं है, और FBI की जारी की गई फाइलें भी इसका समर्थन नहीं करतीं (FBI रिकॉर्ड्स: द वॉल्ट)। इसे असत्यापित की श्रेणी में रखिए।
एलियन और UFO (असाबित, कोई भौतिक सबूत नहीं)। यही वो मशहूर थ्योरी है — बिना आवाज़ वाले यान, अंग काटते जीव, रात के आसमान में रोशनियाँ। 1967 में स्निपी के बाद से यह इस कहानी का हिस्सा रही है (विकिपीडिया)। पर एक बात गाँठ बाँध लीजिए: दशकों की संघीय और राज्यीय जाँच में, किसी भी जाँच ने एलियन की भागीदारी का कोई भौतिक सबूत पेश नहीं किया। आधिकारिक नतीजे बार-बार शिकारियों पर ही आकर रुकते रहे (विकिपीडिया: पशु विकृति)। एलियन वाली व्याख्या एक आस्था है, कोई खोज नहीं — और यहाँ हम इसे साफ़-साफ़ असाबित बता रहे हैं।
एक और ईमानदार बात याद रखने लायक: ख़ुद स्निपी के मामले में — वही केस जिसने इस पूरे रहस्य को जन्म दिया — कॉन्डन कमेटी के एक जाँचकर्ता को किसी असामान्य कारण का "कोई सबूत" नहीं मिला, और बाद में कॉलेज के दो छात्रों ने कबूल किया कि उन्होंने ही घोड़े को गोली मारी थी (विकिपीडिया: "स्निपी" की विकृति)। यह कहानी पहले ही दिन से तथ्यों से कहीं बड़ी बन गई थी।
स्रोत और आगे पढ़ें
- पशु विकृति — विकिपीडिया
- "स्निपी" घोड़े की विकृति — विकिपीडिया
- गेब वाल्डेज़ — विकिपीडिया
- पशु विकृति का रहस्यमय इतिहास — HISTORY
- पशु विकृति फाइलें — FBI रिकॉर्ड्स: द वॉल्ट
- पशु विकृतियाँ — एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ अर्कांसस
पशु विकृति की पूरी कहानी का सबसे अजीब हिस्सा शायद यही है कि इसका जवाब आख़िर में कितना आम निकला — एक मरी हुई गाय, एक भूखा सियार, धूप में फूलती एक लाश। पर इससे एक और कठिन सवाल खड़ा होता है, जो हमें यहाँ बहुत पसंद है: आख़िर इंसान बार-बार एक बिल्कुल प्राकृतिक मौत को देखकर सीधे सितारों की ओर हाथ क्यों बढ़ा देता है? क्योंकि अगला मामला जो हम आपको दिखाने वाले हैं, उसे एक साथ दर्जनों लोगों ने अपनी आँखों से देखा था — और उसे यूँ ही झटक देना कहीं ज़्यादा मुश्किल है।
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