गहरे समुद्र के 10 रहस्य जो आज भी अनसुलझे हैं
रहस्यमयी "ब्लूप" ध्वनि से लेकर समुद्र तल पर धीरे-धीरे टिमटिमाती रोशनी तक — गहरे समुद्र के 10 प्रलेखित रहस्यों को जानिए जिन्हें वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह नहीं समझा पाए हैं।
महासागर का 80 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा आज तक न तो मानचित्रित (mapped) किया गया है, न खोजा गया है, और न ही मानव आंखों ने उसे कभी देखा है। हमारे पास मंगल (Mars) और चंद्रमा (Moon) की सतह के बेहतर नक्शे हैं, बनिस्बत अपने ही समुद्र तल के। तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि गहराई — कुछ हज़ार फीट नीचे की वह कुचल देने वाली, प्रकाशहीन दुनिया — हमें ऐसी पहेलियां सौंपती रहती है जिन्हें बेहतरीन उपकरण और कुशाग्र दिमाग भी पूरी तरह हल नहीं कर पाए हैं।
नीचे दिए गए सभी मामले वास्तविक और प्रलेखित (documented) हैं। हाइड्रोफोन (hydrophone) ने सचमुच इन ध्वनियों को रिकॉर्ड किया। पनडुब्बियों (submersibles) ने सचमुच इन चीज़ों की तस्वीरें खींचीं। शोधकर्ताओं ने सचमुच इन अवलोकनों को समकक्ष-समीक्षित (peer-reviewed) शोधपत्रों और सरकारी अभिलेखागारों में दर्ज किया। इन सबको एक पतली, ईमानदार रेखा जोड़ती है: हम जानते हैं कि कुछ हुआ था, और हम आज भी ठीक-ठीक यह नहीं कह सकते कि क्यों हुआ। यहां गहरे समुद्र के दस ऐसे रहस्य हैं जो वाकई आज भी अनसुलझे हैं।
1. द ब्लूप (The Bloop)
1997 में, अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (U.S. National Oceanic and Atmospheric Administration) के पानी के नीचे लगे माइक्रोफोनों ने दूरस्थ दक्षिणी प्रशांत महासागर (South Pacific) से एक असाधारण रूप से तेज़, अति-निम्न-आवृत्ति (ultra-low-frequency) वाली ध्वनि पकड़ी। इसे उपनाम मिला "द ब्लूप" — यह इतनी शक्तिशाली थी कि 3,000 मील से भी अधिक दूरी पर लगे संवेदकों ने इसका पता लगा लिया, और इसकी ऊपर चढ़ती हुई तारत्व (pitch) की रूपरेखा कुछ हद तक किसी जीवित प्राणी द्वारा उत्पन्न ध्वनि जैसी लगती थी। NOAA ने बाद में निष्कर्ष निकाला कि यह सबसे अधिक संभवतः किसी बड़े बर्फकंप (icequake) — यानी टूटते हुए हिमशैल (iceberg) — की आवाज़ थी, फिर भी वह सटीक घटना किसी विशिष्ट हिमनद (glacier) से कभी नहीं जोड़ी जा सकी, और रिकॉर्डिंग का वह विचित्र, लगभग जैविक स्वरूप आज भी बहस को हवा देता है।
2. जूलिया (Julia)
ब्लूप से एक साल पहले, मार्च 1999 में, NOAA की भूमध्यरेखीय प्रशांत हाइड्रोफोन सरणी (equatorial Pacific hydrophone array) ने एक और विसंगति पकड़ी जिसे एजेंसी ने "जूलिया" नाम दिया। यह ध्वनि लगभग 15 सेकंड तक चली और इतनी तेज़ थी कि पूरी सरणी में सुनी जा सकती थी, जिससे वैज्ञानिकों को संदेह हुआ कि अंटार्कटिका (Antarctica) के पास कोई बहुत बड़ा हिमशैल समुद्र तल से रगड़ खा रहा होगा। लेकिन स्रोत हिमशैल की कभी पहचान नहीं हो पाई, और चूंकि बाद में कभी कोई मेल खाता संकेत नहीं आया, इसलिए जूलिया अभिलेख में एक अकेली, एक-बार-की प्रविष्टि बनी हुई है — अंधेरे से उठी एक अकेली चीख, जिसका रचयिता कभी पुष्ट नहीं हुआ।
3. द स्लो डाउन (The Slow Down)
1997 में ही रिकॉर्ड की गई "स्लो डाउन" को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसकी आवृत्ति लगभग सात मिनट में धीरे-धीरे गिरती गई — एक असामान्य रूप से लंबी और स्थिर गिरावट। NOAA की सबसे अच्छी व्याख्या यह है कि यह किसी अंटार्कटिक हिमशैल के समुद्र तल से टकराकर रुकते हुए और रगड़ खाते हुए धीमे पड़ने की आवाज़ थी। दिलचस्प बात यह है कि स्लो डाउन जैसी ध्वनियां कथित तौर पर बाद के अवसरों पर भी पकड़ी गई हैं, जो एक कथित रूप से एकल टकराव की घटना के लिए असामान्य है, और किसी ने भी पूरी तरह यह नहीं समझाया है कि वह विशिष्ट हस्ताक्षर (signature) बार-बार क्यों आ रहा है।
4. अपस्वीप (Upsweep)
1991 में NOAA की प्रशांत सरणी के चालू होने पर पहली बार पकड़ी गई "अपस्वीप" एक मौसमी ध्वनि है जो वसंत और शरद ऋतु में तीव्रता में बढ़ती है और दशकों से रुक-रुककर बनी हुई है। शोधकर्ताओं ने इसका सुराग दक्षिणी प्रशांत महासागर में पानी के नीचे की ज्वालामुखीय गतिविधि (volcanic activity) वाले एक क्षेत्र तक पहुंचाया, जिससे समुद्री जल और पिघले लावा के बीच एक संबंध का संकेत मिलता है। फिर भी, इतना सुसंगत, लंबे समय तक चलने वाला और कैलेंडर के अनुसार बंधा हुआ संकेत उत्पन्न करने वाली सटीक प्रक्रिया (mechanism) की कभी पुष्टि नहीं हुई, और स्रोत बिंदु समय के साथ हल्का-हल्का खिसकता रहता है।
5. 52-हर्ट्ज़ व्हेल (The 52-Hertz Whale)
1980 के दशक के उत्तरार्ध से, हाइड्रोफोनों ने एक ऐसी अकेली व्हेल का पता लगाया है जो लगभग 52 हर्ट्ज़ की आवृत्ति पर पुकारती है — जो ब्लू व्हेल (blue whale) की लगभग 15 से 25 हर्ट्ज़ की पुकार या फिन व्हेल (fin whale) की पुकार से कहीं अधिक ऊंची है। इसे "दुनिया की सबसे अकेली व्हेल" का नाम दिया गया है — यह एक ऐसे तारत्व (pitch) पर गाती प्रतीत होती है जिसका जवाब देने वाली कोई अन्य व्हेल ज्ञात नहीं है, और वर्षों से इसका प्रशांत महासागर में पीछा किया जाता रहा है। वैज्ञानिक आज भी इस बात पर सहमत नहीं हैं कि यह प्राणी आखिर है क्या — एक संकर (hybrid), एक विकृति, किसी अज्ञात आबादी का अंतिम सदस्य — या कि यह वाकई उतना ही अकेला है जितना उसकी असामान्य आवाज़ संकेत देती है।
6. एल्टानिन एंटीना (The Eltanin Antenna)
1964 में, शोध जहाज़ (research vessel) यूएसएनएस एल्टानिन (USNS Eltanin) ने दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर के पास, लगभग 13,500 फीट गहराई पर समुद्र तल पर एक चौंका देने वाली वस्तु की तस्वीर खींची: एक सममित (symmetrical), खंभे जैसी संरचना जो बिल्कुल समान कोणों पर शाखाएं फैलाए हुए थी, और देखने में परेशान कर देने वाली हद तक एक टेलीविजन एंटीना जैसी लग रही थी। यह तस्वीर दशकों तक एक "अनसुलझी" कलाकृति के रूप में प्रचलित रही। तब से समुद्री जीवविज्ञानियों (marine biologists) ने इसकी पहचान कॉन्ड्रोक्लैडिया (Chondrocladia) वंश के एक मांसाहारी स्पंज (carnivorous sponge) के रूप में कर ली है, लेकिन मूल पहेली — कि घोर अंधकार में इतनी सटीक, अभियंत्रित-सी दिखने वाली ज्यामिति (geometry) प्राकृतिक रूप से कैसे उत्पन्न होती है — आज भी इस तस्वीर को महासागर की सबसे झकझोर देने वाली छवियों में से एक बनाए रखती है।
7. गहरे समुद्र का "ब्राइनिकल" (The Deep-Sea "Brinicle")
ध्रुवीय समुद्री बर्फ (polar sea ice) के नीचे, गोताखोरों और कैमरा टीमों ने एक ऐसी घटना फिल्माई है जिसे "ब्राइनिकल" या "मौत की बर्फीली उंगली" (ice finger of death) का उपनाम मिला है — नीचे की ओर बढ़ती हुई बर्फ की एक नली जो समुद्र तल की ओर सर्पाकार बढ़ती है और जहां छूती है वहां तारामछली (starfish) और समुद्री अर्चिन (urchins) को जमा कर ठोस कर देती है। इसके पीछे का भौतिकी (physics) यह है कि अत्यधिक ठंडा, अति-नमकीन खारा पानी (brine) नीचे डूबता है और अपने आसपास के पानी को तत्काल जमा देता है। फिर भी, वे सटीक परिस्थितियां जो किसी ब्राइनिकल को रास्ते में घुले बिना पूरी तरह तल तक सही-सलामत पहुंचने देती हैं, उनका पूर्वानुमान लगाना आज भी कठिन है, और बहुत कम लोगों ने कभी इसे शुरू से अंत तक बनते देखा है।
8. खारे जलकुंड और उनके "तट" (Brine Pools and Their "Shorelines")
गहरे समुद्र तल पर, विशेषकर मेक्सिको की खाड़ी (Gulf of Mexico) में, पनडुब्बियों ने पानी के नीचे की झीलें खोजी हैं — पानी के ऐसे जलकुंड (pools) जिनमें घुला हुआ नमक इतना घना है कि वे ऊपर के समुद्र के साथ मिश्रित नहीं होते, और इनमें लहराती सतहें तथा स्पष्ट "तट" (shorelines) तक होते हैं। इनमें भटककर पहुंचने वाले जानवर अत्यधिक लवणता (salinity) से मारे जा सकते हैं, इसलिए इनके किनारे कभी-कभी मसल्स (mussels) और भटके हुए जीवों के अवशेषों से घिरे रहते हैं। शोधकर्ता आज भी इस पर बहस करते हैं कि ये स्थिर सीमाएं इतने लंबे समय तक कैसे बनी रहती हैं और इनकी विषैली गहराइयों में किस प्रकार का असामान्य, संभवतः प्राचीन सूक्ष्मजीवी जीवन (microbial life) पनपता है।
9. दूधिया समुद्र की चमक (The Milky Sea Glow)
सदियों से, नाविक ऐसी रातों की रिपोर्ट देते रहे हैं जब महासागर क्षितिज से क्षितिज तक एक स्थिर, भुतहा सफेद रोशनी से चमकता है — ऐसे "दूधिया समुद्र" (milky seas) जो इतने चमकीले होते थे कि उन्हें कभी-कभी बर्फ के मैदान समझ लिया जाता था। माना जाता है कि यह प्रभाव जैव-दीप्तिमान बैक्टीरिया (bioluminescent bacteria) की विशाल कॉलोनियों से आता है, और हाल के वर्षों में उपग्रहों (satellites) ने आखिरकार पुष्टि कर दी है कि ये चमक वास्तविक हैं, जो कुछ देशों से भी बड़े क्षेत्रों को ढक लेती हैं। लेकिन वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह यह नहीं समझा सकते कि किसी दूधिया समुद्र को क्या चीज़ उत्प्रेरित (trigger) करती है, बैक्टीरिया चमकते-बुझते रहने के बजाय लगातार चमकने के लिए आपस में तालमेल क्यों बैठाते हैं, या खुले पानी में इतने विशाल समूह (blooms) कैसे इकट्ठे होते हैं।
10. मध्य-महासागर की भूली-बिसरी धीमी धड़कन (The Forgotten Slow Pulse of the Mid-Ocean)
गहराई में, उपकरणों ने बार-बार धुंधले, लयबद्ध ध्वनिक (acoustic) और दाब (pressure) संकेत दर्ज किए हैं जो न तो ज्ञात व्हेल पुकारों से, न जहाज़ों की आवाजाही से, और न ही भूकंपीय (seismic) घटनाओं से मेल खाते हैं — इनमें दुनिया भर के स्थलों पर पकड़े गए निम्न-आवृत्ति वाले "गुंजार" (hums) का एक लंबे समय से चला आ रहा परिवार भी शामिल है। इनमें से कुछ को समुद्री लहरों के समुद्र तल के साथ क्रिया करने से जोड़ा गया है, लेकिन अलग-अलग वेधशालाओं (observatories) द्वारा रिकॉर्ड की गई विशिष्ट स्थानीय धड़कनें कभी-कभी इस व्याख्या को नकार देती हैं। गहराई का इतना कम हिस्सा उपकरण-युक्त (instrumented) होने के कारण, हर बेमेल धड़कन इस बात की याद दिलाती है कि कितनी नियमितता से यह अतल गहराई (abyss) ऐसी आवाज़ करती है जिसे हम अब तक नाम नहीं दे पाए हैं।
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इन सभी दसों मामलों में एक ही पैटर्न दिखता है: गहरा समुद्र न तो शांत है, न खाली, और न ही सरल। यह तेज़ आवाज़ों से भरा, भीड़भाड़ वाला और विचित्र है, और हमारे संवेदक लगातार ऐसी घटनाओं के किनारे पकड़ते रहते हैं जिनकी हमारे पास कोई साफ़ व्याख्या नहीं है। इनमें से अधिकांश आखिरकार बेहतर उपकरणों और धैर्यवान विज्ञान के आगे झुक जाएंगे — लेकिन फिलहाल ये खुली फ़ाइल में, इंतज़ार करते हुए पड़े हैं।
इनमें से किसी के पीछे की पूरी कहानी जानना चाहते हैं? हमारी अलग-अलग केस फ़ाइलों में गोता लगाइए और सबूतों, प्रमुख सिद्धांतों, तथा अब भी अनुत्तरित रह गए सवालों को खंगालिए।
स्रोत और अतिरिक्त पठन
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