WWII के Foo Fighters: वो रहस्यमयी चमकती गेंदें जो मित्र देशों के पायलटों का पीछा करती थीं
1944 में मित्र देशों के पायलटों ने चमकते नारंगी गोलों को देखा जो उनके विमानों का पीछा करते थे। इन्हें foo fighters कहा गया — आज भी कोई जवाब नहीं।
दिसंबर 1944। Rhine नदी के ऊपर घनी काली रात। एक नाइट फाइटर विमान अंधेरे को चीरते हुए जर्मन जहाज़ों की तलाश में उड़ रहा था। तभी रडार ऑपरेटर की नज़र ऊपर गई — और वो जो दिखा, उसने उसकी सांसें रोक दीं। आठ से दस चमकती नारंगी गेंदें, आसमान में एक सीधी कतार में — जैसे किसी ने क्रिसमस की लड़ियाँ लटका दी हों, बिना किसी तार के।
पायलट ने इंजन को पूरी रफ़्तार दी। जहाज़ मोड़ा। गोता लगाया। लेकिन वो रोशनियाँ? वो पंख से चिपकी रहीं — हर मोड़ पर, हर गोते पर। फिर एक पल — और सब बुझ गया। जैसे थीं ही नहीं।
ज़मीन पर उतरने के बाद ग्राउंड रडार ने कुछ नहीं दिखाया। लेकिन ये पागलपन नहीं था — ये लड़ाके पायलट थे, तेज़ दिमाग़, बेहतरीन रिकॉर्ड वाले। तो फिर उनके विमान के साथ-साथ क्या उड़ रहा था? उन्हें एक नाम चाहिए था। जो नाम उन्होंने चुना, वो अस्सी साल बाद भी ज़िंदा है: foo fighters।

दर्ज सच्चाइयाँ
Foo fighters असली रिपोर्ट थीं, असली सैनिकों की — इस पर कोई सवाल नहीं। 1944 से 1945 के बीच, यूरोप और प्रशांत महासागर के ऊपर मित्र देशों के उड़ान दल बार-बार एक ही अजीब चीज़ बयान करते रहे: तेज़, चमकती रोशनी की गेंदें जो उनके विमानों के साथ-साथ चलती थीं — और जिन्हें वो किसी चीज़ से नहीं मिला सकते थे।
नाम आया अमेरिकी 415th Night Fighter Squadron से। रडार ऑपरेटर Donald J. Meiers, शिकागो का एक लड़का जो Smokey Stover कॉमिक स्ट्रिप का दीवाना था, उसने उसका मशहूर जुमला उड़ाया — "where there's foo, there's fire।" नवंबर 1944 के अंत में एक मिशन के बाद, दिमाग़ में वो रोशनियाँ ताज़ा थीं, Meiers ने अपना कॉमिक पटका और उन्हें "another one of those [foo] fighters" कह दिया। उनके स्क्वाड्रन कमांडर ने बाद में इस शब्द को आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए संवारा (HISTORY)।
देखे जाने की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ने लगीं। 27 नवंबर 1944 को पायलट Lt. Ed Schlueter और उनके दल ने फ्रांस-जर्मन सीमा के पास ऊँची-ऊँची मोड़ों में एक लाल आग की गेंद की रिपोर्ट दी जो उनका पीछा कर रही थी (HISTORY)। इंटेलिजेंस ऑफ़िसर Lt. Fred Ringwald ने कहा कि उन्होंने पहली बार Strasbourg के पास "आठ से दस" चमकती नारंगी रोशनियाँ एक कतार में देखीं। Schlueter ने उनका पीछा करने की कोशिश की। वो गायब हो गईं — और मित्र देशों के ग्राउंड रडार ने उन्हें कभी नहीं पकड़ा (HISTORY)।
और भी रिपोर्टें आईं। 17 दिसंबर को Breisach के पास 800 फ़ीट की ऊँचाई पर एक पायलट ने "T" आकार में पाँच-छह चमकती लाल-हरी रोशनियाँ देखीं जो 1,000 फ़ीट तक करीब आईं, फिर गायब हो गईं। 22 दिसंबर को Hagenau के ऊपर, दो दलों ने नारंगी रोशनियाँ रिपोर्ट कीं जो ज़मीन से 10,000 फ़ीट तक उठीं और करीब दो मिनट तक उनके फाइटर का पीछा करके मुड़ गईं (HISTORY)।
पायलटों ने इन्हें आग जैसा, चमकदार बताया — लाल, सफ़ेद या नारंगी — और कुछ ने कहा वो बिल्कुल क्रिसमस ट्री की रोशनियों जैसे लगते थे। वो "उनके विमान के साथ क़तार में उड़ते थे और ऐसे व्यवहार करते थे जैसे किसी बुद्धिमान के नियंत्रण में हों, लेकिन कभी कोई दुश्मनी नहीं दिखाई।" सबसे अहम बात — उन्हें "न चकमा दिया जा सकता था, न गोली से गिराया जा सकता था" (Wikipedia)।
और ये सिर्फ़ अमेरिकियों की बात नहीं थी। RAF के दलों ने 1942 से ही अपने विमानों के पीछे रोशनियाँ देखने की खबरें दी थीं, और U.S. 422nd Night Fighter Squadron ने अक्टूबर 1944 की शुरुआत में ही पहले दर्शन दर्ज किए थे — हालाँकि असली बाढ़ नवंबर के अंतिम हफ़्ते में आई (Wikipedia)।
अफ़सरों ने इसे गंभीरता से लिया। 13 दिसंबर 1944 को Paris में Supreme Headquarters Allied Expeditionary Force ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की — जो अगले दिन The New York Times में छपी — और इस घटना को "नया जर्मन हथियार" कहा। 15 जनवरी 1945 तक Time पत्रिका ने "Foo-Fighter" शीर्षक से एक ख़बर छापी, जिसमें बताया कि एक महीने से भी ज़्यादा समय से आग के गोले अमेरिकी नाइट फाइटरों का पीछा कर रहे हैं (Wikipedia)।

असली अनसुलझा सवाल
सच्चाई की जड़ तक जाएँ तो: आज तक कोई नहीं जान पाया कि foo fighters असल में थे क्या।
मित्र देशों को यकीन था कि उन्होंने पहेली सुलझा ली — कोई गुप्त नाज़ी हथियार, शायद पायलटों को घबराने की मनोवैज्ञानिक चाल। लेकिन युद्ध खत्म हुआ, जर्मनी की प्रयोगशालाएँ छान मारी गईं — और कोई "foo fighter" डिवाइस नहीं मिला। दूसरी तरफ़, Axis देश भी अपनी अजीब रोशनियाँ देख रहे थे — और सोच रहे थे कि मित्र देश उनके पीछे हैं।
तो यही है वो सवाल जो कभी बंद नहीं हुआ। रिपोर्टें ठोस हैं। गवाह प्रशिक्षित, होशियार और असाधारण रूप से एकमत थे। लेकिन रोशनियाँ कोई मलबा नहीं छोड़ गईं, कोई सत्यापित फ़ोटो नहीं, ग्राउंड पर कोई रडार संकेत नहीं। हमारे पास बचा है ढेर सारा विश्वसनीय गवाही — किसी चीज़ की ओर इशारा करती हुई। बस, उस "चीज़" पर कोई सहमति नहीं।

सिद्धांत और व्याख्याएँ
नीचे जो कुछ भी है वो व्याख्या है, तय सच्चाई नहीं। हर सिद्धांत को एक उम्मीदवार मानें, फ़ैसला नहीं।
St. Elmo's fire और दूसरे विद्युत प्रभाव। यह सबसे ज़मीनी स्पष्टीकरण है। St. Elmo's fire असली प्लाज़्मा चमक है जो कुछ मौसम में विमान के पंखों के आसपास झिलमिला सकती है। युद्ध के बाद Robertson Panel (1953) ने इसी दिशा में झुकाव दिखाया — सुझाव दिया कि foo fighters शायद "electrostatic phenomena similar to St. Elmo's fire, electromagnetic phenomena, or simply reflections of light from ice crystals" थे (Wikipedia)। यह मुमकिन है — लेकिन संदेहवादी कहते हैं यह उन रोशनियों को नहीं समझाता जो विमानों का पीछा कर क़तार बनाती थीं।
Ball lightning। कुछ foo fighter विवरण ball lightning के खातों से मिलते-जुलते हैं — एक दुर्लभ, चमकता गोला जो तैरता है फिर ग़ायब हो जाता है (Wikipedia)। मुश्किल यह है कि ball lightning ख़ुद अभी भी ठीक से समझी नहीं गई, तो एक रहस्य के बदले दूसरा रहस्य मिलता है।
पायलट का भटकाव और आँखों का धोखा। रात में उड़ना, थके हुए, कॉकपिट के काँच से उछलती रोशनियाँ — इंसानी आँख ऐसी हरकत "देख" सकती है जो है ही नहीं। अमेरिकी नौसेना ने अप्रैल 1945 में खासतौर पर "aviators' vertigo" और रात की उड़ान के दृश्य भ्रमों की जाँच शुरू की (Wikipedia)। यह कुछ रिपोर्टें समझा सकता है — हालाँकि उन दलों को समझाना मुश्किल है जिन्होंने एक ही समय में एक ही चीज़ देखी।
दुश्मन का गुप्त हथियार। युद्धकाल की सबसे प्रिय कल्पना। दशकों बाद लेखक Renato Vesco ने दावा किया कि जर्मनों ने एक ज़मीन से लॉन्च होने वाला "Feuerball" ड्रोन बनाया था। लेकिन असलियत: ऐसे किसी उपकरण के अस्तित्व का कोई ठोस सबूत नहीं है (Wikipedia)। इसे अप्रमाणित की श्रेणी में रखें।
परग्रही यान। यह सबसे सुर्खियाँ बटोरने वाला पाठ है — कि foo fighters एलियन UFO थे (जिन्हें अब UAP कहते हैं), "flying saucer" शब्द के जन्म से दशकों पहले। Robertson Panel ने ख़ुद सोचा था कि "अगर 1943–1945 में 'flying saucers' शब्द प्रचलित होता, तो इन्हें वही कहा जाता" (Wikipedia)। यह एक रोमांचक विचार है — और सबसे कम सबूतों वाला। न कोई बरामद यान, न सत्यापित फ़ोटो, न कोई भौतिक निशान। एक स्पष्टीकरण के रूप में यह पूरी तरह अटकलबाज़ी और अप्रमाणित है — चाहे हरकतें कितनी भी दूसरी दुनिया की लगती हों।
स्रोत और आगे पढ़ें
- Mysterious UFOs Seen by WWII Airmen Still Unexplained — HISTORY
- Foo fighter — Wikipedia
- The World War II story of the first time US military pilots encountered UFOs — Task & Purpose
अस्सी साल बाद भी, foo fighters इतिहास के रिकॉर्ड में वैसे ही टँगे हैं — चमकते हुए, अनसुलझे, और गोली से मिटाए न जा सकने वाले। और ये आख़िरी बार नहीं था जब प्रशिक्षित गवाहों के आसमान में कुछ ऐसा दिखा जिसे आधिकारिक रिपोर्ट भी नाम न दे सकी। कभी-कभी तो भीड़ और भी बड़ी थी। कभी-कभी गवाह बच्चे थे।
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